Wednesday, June 20, 2012

प्रेमी बाबा



प्रेमी बाबा का परिचय 


शब्द-ब्रह्म की साधना और अध्यात्म-चिंतन की चिरंतन चर्या में रत श्री प्रेमी मथुरियाजी भगवद्-प्रेमियों, साधकों और अपने अनुरागियों के बीच ‘प्रेमी बाबा’ के नाम से संबोधित किये जाते हैं । मथुरा में यमुना-तट पर, गोवर्धन की रमणीक उपत्यका में एवं वृन्दावन की वीथियों में संत-समागम और भजनानंद की दिव्य आराधना के पश्चात् आपने विश्वनाथपुरी काशी को अपनी अध्यात्म-साधना का केन्द्र बनाया । सन् १९८७ से आप गृहस्थ-जीवन से विरत रहते हुए तंत्रानुसंधान और शक्ति-साधना में निष्ठित हैं ।

२१ वर्षो के अखंड काशी-प्रवास के दौरान आप स्वामी करपात्रीजी महाराज, स्वामी अखंडानंदजी सरस्वती, डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉ.भोलाशंकर व्यास, डॉ. श्रीनाथजी मिश्र, पं.रामकिंकरजी उपाध्याय, पूज्यपाद प्रभुदत्तजी ब्रह्मचारी, पूज्य संत श्री डोंगरेजी महाराज, भाई श्री रमेश भाई ओझा, राष्ट्रीय संत श्री मोरारी बापू आदि विश्वविख्यात संतो-विद्वानों के सानिध्य में आये और आध्यात्मिक आयोजनों में उल्लेखनीय रूप से जुड़े रहे । गीताप्रेस व ‘कल्याण’ के प्रवत्र्तकसंपादक भाईजी श्री हनुमानप्रसादजी पोद्दार की स्मृति में संचालित धर्मार्थ ट्रस्ट और अंध विद्यालय के प्रबंधन-कार्य से भी आप वर्षो तक जुड़े रहे । आपने अनेक आध्यात्मिक ग्रंथों, साहित्यिक पुस्तकों व स्मारिकाओं की रचना व सम्पादन-कार्य किया है ।

आदरणीय प्रेमी बाबा सम्प्रति मथुरा में अपने साधनानुष्ठानों का सम्पादान करते हुए आध्यात्मिक जीवनचर्या व्यतीत कर रहे हैं और सत्संग, स्वाध्याय तथा भगवद्-आराधना में लीन रहते हुए संतप्त और दु:खी मानवता को आनन्द-रस का अस्वादन कराने में सतत् संलग्न हैं ।

– सनेही राम जादौन

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